गुरु नानक देव जी और कलयुग का वार्तालाप



 एक समय की बात है श्री गुरु नानक देव जी रामेश्वरम की प्रख्यात भूमि पर जा पहुंचे उस समय अत्यंत भयानक आंधी आई,आंधी इतनी भयंकर थी कि पेड़ पौधे भी उस आंधी से ना बच सके। चारों और मिट्टी उड़ रही थी, यह देखकर सभी पशु पक्षी भयभीत हो गए थे। किसी भी प्राणी का चलना मुश्किल हो रहा था।

यह देखकर भाई मरदाना डर के मारे नीचे बैठ गए थे। उनको इस स्थिति में बैठे देख कर श्री गुरु नानक देव जी ने मर्दाना को कहा, डरने से तुम्हारा भय दूर नहीं होगा। तुम वाहेगुरु का सिमरन करो। कुछ समय बाद आंधी तो खत्म हो गई लेकिन दक्षिण दिशा से एक भयानक राक्षस आता नजर आया। उसका आकार इतना बड़ा था कि कोई भी उसको देख कर डर जाए। वह राक्षस बाबा नानक और भाई मरदाना की तरफ आने लगा।

भाई मरदाना उसको देखकर डर गया और बाबा नानक से बोला, गुरु जी हम उस आंधी से तो बच गए लेकिन इस राक्षस से कैसे बचेंगे ? बाबा नानक बोले मर्दाना यह कलयुग है, पहले यह आंधी की शक्ल में आया, अब यह राक्षस बन कर आया है। मर्दाना तुम डरो मत वाहेगुरु का सिमरन करो। यह तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता। इसके बाद कलयुग ने भयानक वर्षा का रूप धारण कर लिया, आसमान में काली घटाएं छा गई। और जोर से बारिश होने लगी।

भाई मरदाना ने बाबा नानक से पूछा कि गुरु जी यह क्या हो रहा है ? कभी यह आंधी का रूप ले रहा है तो कभी राक्षस का और अब इसमें बारिश का रूप ले लिया है। यह सब कब रुकेगा। भाई मरदाना की बात सुनकर बाबा नानक ने कहा कि जो परमात्मा से परे है और जो दूसरों को दुख पहुंचाता है। उसी को इन चीजों का भय होता है। हर किसी का कोई ना कोई सहारा है लेकिन संत महात्मा को सिर्फ एक ही सहारा होता है परमात्मा का। जो पूरी सृष्टि को संभालता है, हे मर्दाना तुम वाहेगुरु का सिमरन करो। वही इन दुखों से बचाने वाला है।

बाबा नानक की सारी बातें कलयुग ने सुनी, और वह इंसानी रूप में बाबा नानक जी के सामने आ गया। गुरुजी ने उससे पूछा भाई तुम कौन हो ? कलयुग बिल्कुल नग्न हो गया और गुरु जी के चरणो में नमस्कार करता हुआ बोला, मैं गुरु जी मैं आपकी महिमा को नहीं जानता था। मैं तो सिर्फ एक उदाहरण के तौर पर आया हूं। मैं तो सिर्फ यह चाहता हूं कि मुझे भी परमात्मा के दरबार में कुछ अधिकार मिले। मैं तो सिर्फ आपकी कृपा चाहता हूं क्योंकि मेरे शासनकाल में नर नारियों की यही अवस्था होगी। जिस अवस्था में आप मुझे देख रहे हैं।

कलयुग में सभी पाठ पूजा सिमरन आदि को त्याग कर भोग विलास में लीन हो जाएंगे। माता पिता, भाई बहन, गुरु शिष्य सभी की मर्यादा भंग कर देंगे। गुरु जी मैंने जो छल आपके साथ किए हैं वह अनजाने में किए हैं। मैं उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूं। आशा है आप मुझे क्षमा कर देंगे। हे गुरु जी आगे आपका किधर जाने का विचार है। गुरु जी बोले हे कलयुग हम परमात्मा की प्राप्ति के लिए इधर-उधर घूम रहे हैं। कलयुग हैरान होकर बोला, आप परमात्मा की प्राप्ति के लिए घूम रहे हो क्या परमात्मा आप से अलग है ? आप भी तो साक्षात परमात्मा हो। परमात्मा आप से अलग कैसे हो सकता है।

गुरुजी बोले हे कलयुग तेरा तो पूरे शासन में प्रभाव है। फिर छल कपट करके तेरा यहां आने का कारण क्या है ? हे गुरु जी मैं अज्ञानवश आपकी परीक्षा लेने और आप के दर्शन करने के लिए इधर आया हूं। तब गुरु जी ने कलयुग से कहा पहले तुम अपने लक्षण बताओ फिर यह बताओ तुम्हारी सेना कौन सी है। हे गुरु जी मेरी सेना का सेनापति झूठ है तथा राजा मोह है और हिंसा छोटा सेनापति और सेना है, काम, क्रोध,  लालच, मोह, अहंकार, आलस्य, यह सब मेरी सेना के महान योद्धा हैं।

जो व्यक्ति इन सब चीजों पर विजय प्राप्त कर लेगा अथवा अपने आसपास नहीं आने देगा वह व्यक्ति अजेय हो जाएगा। लेकिन गुरु जी मेरी यह सेना किसी से नहीं हारती सब को जीतना इसका बाएं हाथ का खेल है। मेरे इन योद्धाओं ने बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों को हराया है। मेरे शासन काल में गुरु और उपदेशक पाखंडी और दुराचारी होंगे। वेद और शास्त्रों की निंदा करा कर अपनी ही पूजा करने पर जोर देंगे। जो जज होगा वह जब न्याय करने बैठेगा तो झूठे पर मानो को सामने रखकर  और रिश्वत लेकर न्याय करेगा। जेब में ईश्वर की तस्वीर होगी और मन में अपराध का निवास होगा। बड़े बड़े साधु अपना चरित्र त्याग कर दुष्ट कर्म करेंगे। भगवे कपड़े पहन कर शासन के मोह  में मारे मारे फिरेंगे। दिखावा तो बहुत होगा लेकिन धर्म का सत्यानाश करेंगे। गुरु जी ऐसी बहुत सारी बातें हैं जो मैं आपके सामने कहना भी नहीं चाहता। कलयुग यह सब बोलकर चुप हो गया।

बाबा नानक ने कलयुग की बातें सुनकर कहा, हे  कलयुग परमात्मा के सामने तुम्हें इन सब बातों का जवाब देना होगा क्योंकि यह तुम्हारी जिम्मेवारी है। तुम इस संसार के रक्षक हो और हम परमात्मा के भगत तुम्हें इन सब बातों का हिसाब देना होगा और परमात्मा इन सब का हिसाब लेने के लिए हमें ही चुनेगा। बताओ उस समय तुम्हारी यह अकड़ कहां जाएगी। यह सुनकर कलयुग ने भयभीत होकर कहा कि मैं इसलिए ही आपकी शरण में आया हूं। जब इन सब बातों का हिसाब देने का समय आएगा तो आपको मुझ पर कृपा करनी होगी। बस एक यही विनती है। बाबा नानक ने कहा जब वह समय आएगा तो हम तुम पर थोड़ी कृपा जरूर करेंगे ।

मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं कि आप मुझ पर कृपा करोगे लेकिन मैं कैसे विश्वास करूं कि आप कृपा करोगे। यदि आप मुझसे कोई भेंट स्वीकार करें तो मुझे विश्वास होगा। गुरुजी बोले हमने सुखों को त्याग कर दुखों को अपनाया है इसलिए हम कोई भी भेंट स्वीकार नहीं कर सकते। परंतु गुरु जी फिर मेरी तसल्ली कैसे होगी ?

तब गुरुजी ने उससे पूछा तुम्हारे पास क्या क्या चीज है जो तुम मुझे दे सकते हो। गुरु जी मेरे पास हीरे मोती सोना चांदी और भी बहुत सारी कीमती चीजें हैं यह सब चीजें मैं आपके चरणों में रखने को तैयार हूं। आप सिर्फ हुकम करें कि आपको क्या चाहिए। बाबा नानक ने ऐसी किसी भी चीज को लेने से इनकार कर दिया। उनकी बातें सुनकर कलयुग बोला कि गुरु जी मैं तो आपका शिष्य बनने आया हूं अगर आप कहें तो मैं आपके लिए सोने का मंदिर बना दूं।

बाबा नानक जी बोले, मैं बाहरी सुंदरता नहीं चाहता। मुझे तो सिर्फ परमेश्वर की भक्ति चाहिए। जो चीजें तुम मुझे देना चाहते हो वह आज किसी के पास है, कल किसी और के पास चली जाएगी। यह चीजें स्थिर नहीं है, यह चीजें हमेशा दुख का कारण बनती हैं। तेरी मुझ में असीम श्रद्धा है तो यह मैं तुझ से दशम रूप में स्वीकार कर लूंगा। तब गुरु जी ने कलयुग से पूछा कि तुमने अपनी धन दौलत तो बता दी इसके अलावा और तुम्हारे पास क्या है। वह भी बताओ, गुरुजी मेरे राज में निंद्रा आलस्य इच्छाएं मस्ती पापी दुराचारी जैसी चीजों का बोलबाला होगा। बुद्धिमान व्यक्ति को मूर्ख समझा जाएगा। और जो व्यक्ति बहुत ज्यादा बोलेगा वह मूर्ख भी होगा तो भी वह समझदार कहलाएगा।

मेरे शासनकाल में यही सब होगा इसलिए मैं चाहता हूं कि मैं आपकी सेवा करके आपका आशीर्वाद प्राप्त करूं। बाबा नानक ने प्रसन्न होकर कहा कि हे कलयुग हमें आपकी सेवा की आवश्यकता नहीं है। लेकिन हम तुम्हें आशीर्वाद देते हैं कि तमाम युगों में तुम्हारा प्रभाव होगा। कलयुग में जो प्रभु का सिमरन करेगा उसकी महिमा बहुत होगी। मैं भी आपसे वादा करता हूं जो आपका सिमरन करेंगे उनसे मैं दूर रहूंगा। यह कहकर कलयुग वहां से चला गया। और गुरु जी अपनी अगली यात्रा पर निकल पड़े।

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