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श्री गुरु नानक देव जी की हरिद्वार यात्रा

श्री गुरु नानक देव जी की सुंदर साखी

आज मैं आपको श्री गुरु नानक देव जी की संपूर्ण हरिद्वार यात्रा की साखी सुनाने जा रही हूं आप सभी से प्रार्थना है कि वह साखी को अंत तक पढ़ें । श्री गुरु नानक देव जी ने जहां जहां पर अपने चरण कमल रखें वहां पर यही ज्ञान दिया कि परमात्मा एक है।

हरिद्वार जो कि भारत में है वहां दूर-दूर से लोग अपने पूर्वजों की मोक्ष  प्राप्ति के लिए पूजा अर्चना करवाने गंगा किनारे आते हैं। एक दिन गुरु नानक देव जी हरिद्वार पहुंचे, वहां पर एक आदमी अपने किसी प्रिय के की मोक्ष प्राप्ति के लिए पंडित जी से पूजा-अर्चना करवा रहे थे। पानी डालते डालते यजमान सोचने लगे दिल्ली में व्यापार में बहुत घाटा हो रहा है वहां जाकर बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। पूजा करवाते करवाते दूसरी और पंडित जी भी सोच रहे थे ज्यादा से ज्यादा दक्षिणा  मिल जाए तो बहुत अच्छा हो मुझे रुपयों की सख्त जरूरत है।

तभी दोनों ने देखा श्री गुरु नानक देव जी सूर्य की विपरीत दिशा में जल चढ़ा रहे हैं । पंडित जी को यह देखकर क्रोध आ गया और वह बोले, आपको यह नहीं पता कि सूर्य की पूजा क्यों की जाती है। श्री गुरु नानक देव जी नम्रता से बोले, मुझे तो नहीं पता तुम ही बता दो। सूर्य की तरफ मुंह करके जल चढ़ाने से ही हमारे पूर्वजों को शांति मिलती है।

गुरुजी ने पंडित जी से पूछा तुम्हारे पूर्वज कहां रहते हैं, पंडित जी बोले वह यहां से हजारों किलोमीटर दूर रहते हैं। श्री गुरु नानक देव जी पानी जोर-जोर से उसी तरह डालने लगे जहां वह पहले डाल रही थे। यह देखकर पंडित जी जोर जोर से बोले यह आप क्या कर रहे हो, मैंने आपको कितना समझाया है फिर भी अब वही कर रहे हो।

गुरुजी बोले, मैं अपने खेत जो कि पंजाब में है उन्हें पानी दे रहा हूं यह सुनकर दोनों हंसने लगे। और यजमान बोले जो तुम्हारे खेत पंजाब में है वहां पानी कैसे चला जाएगा ? गुरुजी बोले क्यों नहीं जा सकता, जब तुम्हारे पूर्वजों तुमसे जो हजारों किलोमीटर दूर है । जब उन्हें पानी जा सकता है तो मेरे खेतों कुछ सो किलोमीटर की दूरी पर है वहां तो आराम से चला जाएगा। यह बात सुनकर पंडित जी और यजमान गहरी सोच में पड़ गए। श्री गुरु नानक देव जी बोले यजमान जब तुम अपनी पूजा करवा रहे थे, तो तुम क्या सोच रहे थे। तुम यह सोच रहे थे ना कि दिल्ली में जो तुम्हारे घाटा हो रहा है वह कैसे कम हो। और पंडित जी आप यह सोच रहे थे ना कि कैसे ज्यादा से ज्यादा रुपए मिले।

यह सुनकर पंडित जी और यजमान हैरान हो गाय और गुरुजी के सामने नतमस्तक हो गए। इस घटना के पश्चात सभी पंडित गुरु जी की शिक्षा से बहुत प्रभावित हुए और वह उन्हें अपने निवास स्थान ले गए। जब पंडित जी श्री गुरु नानक देव जी को रसोई की ओर ले जा रहे थे तो गुरुजी ने देखा फर्श पर एक लाइन अथवा रेखा बनी हुई है। असल में वह रेखा इसलिए बनाई गई थी जिससे कोई भी नीच जाति का व्यक्ति उसके पास जाने की हिम्मत ना कर सके। रसोई के अंदर साफ-सुथरे कपड़े पहने हुए पंडित जी भोजन बना रहे थे। गुरु जी ने सभी से कहा तुम्हारा चौका तो गंदा हो गया है। पंडित जी बोले नहीं गुरु जी ऐसा कैसे हो सकता है ? लकड़ियों को हमने अच्छी तरह से धोया है, बर्तनों को अच्छी तरह से साफ किया है और हम सभी नहाए हुए भी हैं। हमारी रसोई में कोई नीच जाति का व्यक्ति भी नहीं आया है फिर हमारा चौका गंदा कैसे हो सकता है।

गुरुजी मुस्कुराए और बोले मुझे तो आपके साथ चार नीच जाति के लोग बैठे हुए नजर आ रहे हैं। पंडित ने हैरानी से गुरु जी से पूछा, कौन है यहां नीच जाति का हमें तो कोई भी नजर नहीं आ रहा। गुरुजी बोले यही तो रहस्य है। आपकी आंखों पर अज्ञानता का पर्दा पड़ा हुआ है। इसी वजह से आपको कुछ दिखाई नहीं देता मैं तुम्हें इन चारों नीच  के बारे में बताता हूं ।

बुरे विचार वह है जिसे तुम नीच जाति बोलते हो किसी के साथ जोर जबरदस्ती या जुल्म करना कसाइयां है यानी वह कसाई के कर्म के बराबर है। दूसरों की निंदा करने वाला और पापो के गंदगी इकट्ठा करने वाला अछूत है। चौथा, क्रोध जो अभी आपके अंदर अग्नि सामान जल रहा है वह चांडाल है। हे पंडित यह सब नीच तुम्हारे अंदर वास करते हैं तो तुम शुद्ध कैसे हो सकते हो। सभी पंडित गुरु जी की बातें सुनकर उनके भक्त बन गए, जब उन्होंने यह देखा कि गुरु जी ने वह सब पढ़ लिया है जो उनके दिमाग में चल रहा था।

गुरुजी ने पंडितों को शिक्षा दे कि सत्य बोलो अपनी इच्छाओं को वश में करो अच्छे कर्म करो मोक्ष उसी व्यक्ति को मिल सकता है जिसके दिमाग में अंत समय में पापो का भार नहीं होगा। सभी पंडित एक साथ बोले गुरु जी हमें अपना शिष्य बना लो। श्री गुरु नानक देव जी ने कहा कि मेरा शिष्य बनना इतना आसान नहीं है। मेरा शिष्य बनने के लिए जो भी धन तुमने बेईमानी से कमाया है वह सब अच्छे कामों में लगाना होगा। सभी पंडितों ने गुरु जी की आज्ञा का पालन किया और उनके शिष्य बन गए ।

कुछ समय बाद सभी गुरुजी के पास गए और बोले गुरु जी हवन करवाया जा रहा है आप भी वहां जरूर पधारें तो गुरु जी ने कहा। जो सही है वह हमेशा सही रहेगा परंतु गलत धारणाएं कभी भी सही नहीं हो सकती। मैं यह चाहता हूं कि सभी ईश्वर का मार्ग अपनाएं । जो उस मार्ग पर चलेगा उसे ईश्वर मिलेगा। घी और अनाज को आग में जलाने से कुछ नहीं मिलेगा। इस दुनिया में बहुत से लोग भूख से मर रहे हैं, तुम भूखों को खाना खिलाओ, यही सच्चा हवन होगा। मुझे किसी प्रचार की जरूरत नहीं है । जो लोग ईश्वर की भक्ति करते हैं ईश्वर उन्हें खुद शक्ति देता है। इसलिए जीवन में मानव सेवा करो अच्छे कर्म करो और ईश्वर का नाम जपो। श्री गुरु नानक देव जी उनको सही रास्ता दिखा कर अपनी अगली यात्रा पर चल पड़े।

शिक्षा : श्री गुरु नानक देव जी की इस सुंदर साखी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जब तक हम पुरानी धारणाओं को तोड़कर आगे नहीं बढ़ेंगे हम कभी भी ईश्वर को प्राप्त नहीं कर सकते।

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