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मन को काबू कैसे करें-How to control the mind

मन को काबू कैसे करें
Buddhist story in hindi

मन को काबू कैसे करें

एक बार भगवान बुद्ध शहर से गुजर रहे थे के उनकी के अचानक उनकी नजर एक कपड़े की दुकान पर गई । कपड़े की दुकान में एक व्यापारी बैठा था जो बहुत दुखी और परेशान नजर आ रहा था । बुद्ध कुछ आगे आए और उस व्यापारी की दुकान के अंदर चले गए । दुकान के अंदर आकर महात्मा बुद्ध ने उस व्यापारी से पूछा कि तुम इतना परेशान और दुखी क्यों हो अगर तुम्हें कोई परेशानी या चिंता है तो मुझे बताओ, हो सकता है मैं शायद तुम्हारी कुछ मदद कर सकूं 

कपड़े के व्यापारी ने, महात्मा बुद्ध को और बड़े ही आदर के साथ दुकान के अंदर बैठाया । फिर उस व्यापारी ने, भगवान बुद्ध से कहा कि कुछ समय पहले मेरी पत्नी की मृत्यु हो गई है तब से मेरे छोटे बेटे की देखभाल करने वाला कोई नहीं है । इस कारण मैं हमेशा उसे अपने साथ, दुकान पर ले कर आता हूं लेकिन मेरा बेटा दुकान पर आने वाले हर ग्राहक की पगड़ी उतार कर फेंक देता है और कई बार तो उनका समान है उठाकर दुकान से बाहर फेंक देता है । मैंने इसे बहुत बार अपने पास बिठाकर प्यार से समझाया हर तरह से समझाने की कोशिश भी की लेकिन यह कुछ भी समझने को तैयार नहीं है ।

इसकी इस तरह की हरकतों की वजह से मेरे सारे ग्राहक, अपने आप को अपमानित समझ कर वापस चले जाते हैं इस वजह से मेरी दुकान का धंधा चौपट हो रहा है । अब तो यह स्थिति हो गई है कि मेरी दुकान पर कोई ग्राहक आना ही नहीं चाहता अब आप ही बताइए मैं क्या करूं ?

महात्मा बुद्ध उसकी बात सुनकर मुस्कुराए और बोले, बस इतनी सी बात है । तुम चिंता मत करो इसमें मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं लेकिन तुम्हें, मुझसे एक वादा करना होगा, मैं जो कुछ भी करूंगा, और जो भी कहूंगा, उसमें तुम दखलंदाजी नहीं करोगे और ना ही मुझसे कोई प्रश्न करोगे तब व्यापारी ने, भगवान बुद्ध से वादा किया और कहां आप जैसा हुकुम करेंगे, वैसा ही होगा ।

मन को काबू कैसे करें

अगले दिन, भगवान बुद्ध पगड़ी पहन कर उस व्यापारी की दुकान पर आए, और एक ग्राहक की तरह आकर वहां बैठ गए । सभी व्यापारी का बेटा आया, और उसने भगवान बुद्ध की पगड़ी को उछाल दिया । भगवान बुद्ध मुस्कुराए और बच्चे को कहा, बहुत अच्छा, अब जाओ और उस पगड़ी को उठाकर वापिस लेकर आओ वह बच्चा दौड़ कर गया, और पगड़ी को वापस लाकर बुद्ध को दिया ।

अगले दिन, भगवान बुद्ध फिर उस व्यापारी की दुकान पर गए वह अपने साथ एक लकड़ी और कुल्हाड़ी लेकर आए । उस लड़के ने फिर से, बुद्ध की पगड़ी को उछाल दिया । भगवान बुद्ध ने उस लड़के को अपने पास बुलाया और लकड़ी और कुल्हाड़ी देते हुए कहा, जाओ इस लकड़ी को काटकर लेकर आओ । लड़का कुल्हाड़ी और लकड़ी लेकर बाहर चला गया ।

व्यापारी को यह देख कर थोड़ा डर लग रहा था के कहीं उसके बेटे को चोट ना लग जाए लेकिन उसको अपना वादा याद था । सात दिनों तक, भगवान बुद्ध, कोई ना कोई, नया काम लेकर आते और उस लड़के से करवाते । कुछ दिनों के अंदर ही वह लड़का भूल गया कि उसे किसी की भी पगड़ी  उछालनी है । व्यापारी यह देखकर बहुत खुश हुआ और उसने भगवान बुद्ध को धन्यवाद कहा ।

मन को काबू कैसे करें

अब यही हाल हमारे मन का है, अगर हम, अपने मन को अपने हिसाब से काम नहीं करवाएंगे तो मन, अपनी मर्जी से काम करेगा । भगवान बुद्ध से, मिलने से पहले उस लड़के का मन और दिमाग, अनियंत्रित रूप से काम कर रहा था लेकिन भगवान बुद्ध ने उस लड़के को एक दिशा दी और उससे इतने काम करवाएं के धीरे-धीरे उसकी आदत बन गई और उसका मन समझ गया कि मैं अनियंत्रित होकर अब काम नहीं कर सकता । मन को काबू में करने के लिए, हमें मन को अपने हिसाब से चलाना होगा ना कि, मन के हिसाब से चलना होगा ।

शिक्षा : महात्मा बुद्ध की इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि मन को काबू किया जा सकता है अगर हम मन काबू करना चाहते हैं तो हमें भी मन को बुरे कर्मों से हटाकर अच्छे कर्मों की तरफ लगाना होगा तो ही हम मन को काबू कर सकते हैं ।


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