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सुख की खोज-Real-happiness-in-life

सुख की खोज
Real happiness in life

सुख की खोज

प्राचीन समय की बात है, एक सम्राट था जिसकी उम्र  सो साल हो चुकी थी । सम्राट का अंतिम समय आ चुका था और एक दिन मौत उसके दरवाजे पर आ खड़ी हुई। मौत ने सम्राट को कहा तुम अपनी जिंदगी जी चुके हो अब तुम्हारा अंतिम समय आ गया है । सम्राट मौत की बात सुनकर घबरा गया और उसने मुझसे कहा कि अभी कहां, अभी तो मैं कुछ जिया ही नहीं, अभी तो मेरी कोई भी आकांक्षाएं पूरी नहीं हुई । अभी तो मैंने पूरी दुनिया को जीतना है । इस दुनिया में कितनी सुंदर स्त्रियां हैं जिनको मैंने अभी देखा ही नहीं इसलिए तुम मुझे अभी मत लेकर जाओ जब मेरी सभी आकांक्षाएं पूरी हो जाए तब मुझे लेने आना ।

मौत ने सम्राट की बात सुन कर कहा कि ऐसा नहीं हो सकता । सम्राट ने मौत से कहा के कोई तो रास्ता होगा जिससे तुम मुझे ना लेकर जाओ ? मौत ने सम्राट से कहा कि हां एक रास्ता है कि अगर तुम्हारी जगह तुम्हारा कोई पुत्र मेरे साथ चलने के लिए तैयार हो जाए तो मैं तुम्हें सो  साल का समय और दे सकता हूं । सम्राट ने अपने सभी पुत्रों को बुलाया और उनसे पूछा लेकिन सभी पुत्रों ने मना कर दिया लेकिन छोटा पुत्र मौत के साथ जाने के लिए तैयार हो गया । छोटे पुत्र ने सम्राट से कहा कि जब आपकी सो साल में दुनिया से तृप्ति नहीं हुई और आपकी सारी आकांक्षाएं अभी अधूरी है तो मैं क्यों सो  साल तक संघर्ष करु जब अंत में जाना ही है तो इसलिए मैं आपकी जगह मौत के साथ जाने के लिए तैयार हूं और वह मौत के साथ चला गया ।

सम्राट को सो साल का और समय मिल गया लेकिन दुनिया के भोग विलास में डूबे सम्राट के सो वर्ष कब बीत गए उसको पता ही नहीं चला । हम इंसानों को पता भी कहां चलता है । हमको पता तब चलता है जब आखरी समय आ जाता है और मौत सिर पर आकर खड़ी हो जाती है । उस समय हमें ध्यान आता है कि समय हाथ से निकल चुका है और अब तक कुछ भी नहीं किया ।

सुख की खोज

सम्राट के साथ भी यही हुआ, जब उसने मौत को अपने सामने देखा तो कहा, तुम फिर आ गई क्या मेरे सो साल पूरे हो गए ? मौत ने जवाब दिया कि हां तुम्हारा वक्त पूरा हो चुका है । सम्राट ने फिर कहा मैंने तो अभी अपना जीवन जिया ही नहीं । मुझे तो अभी तक इस जीवन में सुख शांति प्राप्त ही नहीं हुई । मैं अभी और जीना चाहता हूं और सुख की तलाश करना चाहता हूं । मौत ने कहा ठीक है मैं तुम्हें सो साल का समय और दे सकती हूं अगर तुम्हारी जगह तुम्हारा कोई पुत्र मेरे साथ जाने के लिए तैयार हो जाए । सो सालों में पुराने बेटे तो मर चुके हैं लेकिन कुछ नए भी पैदा हो गए थे । उन बेटों में से एक बेटा और मौत के साथ जाने के लिए तैयार हो गया और इस तरह सम्राट को सो साल का समय और मिल गया ।

इस तरह सो साल और बीत गए, कब बीत गए सम्राट को पता भी नहीं चला । सम्राट ने सोचा था कि सो साल का समय बहुत होता है सुख शांति की तलाश कर ही लेंगे लेकिन उसे कुछ भी हासिल नहीं हुआ फिर मौत सामने आ खड़ी हुई । सम्राट मौत को देखकर घबरा गया । उसने पूछा तुम फिर आ गई । मौत ने जवाब दिया कि तुम्हारे सो साल पूरे हो गए हैं । तुमने इतने वर्षों तक किया क्या है ? अभी तक तुम्हें सुख और शांति प्राप्त नहीं हुई है । तुम दो सो वर्षों बाद भी पहले की तरह उदास नजर आ रहे हो ।

सुख की खोज

सम्राट ने जवाब दिया कि मैं रोज सुख और शांति की तलाश करता हूं तो लगता है कि कल मिल जाएगा लेकिन जब अगला दिन आता है तो फिर निराशा  हाथ लगती है । इस सुख की प्राप्ति के लिए मैंने कितना सारा धन इकट्ठा कर लिया कितनी सुंदर स्त्रियों से विवाह कर लिया लेकिन जिस सुख की मैं तलाश में था वह मुझे अभी तक प्राप्त नहीं हुआ । तुम एक काम करो मुझे सो बरस और दे दो । मैं निश्चित ही इन सो वर्षों मे सुख की तलाश कर ही लूंगा । मौत ने सम्राट की बात मान ली लेकिन उसी शर्त पर कि तुम्हारी जगह तुम्हारा एक बेटा मेरे साथ जाएगा ।

 ऐसे ही सम्राट एक हजार वर्षों तक इस दुनिया में सुख की तलाश करता रहा । एक हजार वर्षों के बाद जब मौत ने दस्तक दी तो सम्राट वही पहले वाली हालत में था जैसे सो वर्ष की उम्र में था लेकिन इस बार उसने मौत को कहा कि मुझे ले ही चलो । हालांकि अभी तक मुझे इस दुनिया में सुख मिला ही नहीं पर मुझे लगता है वह मिलेगा कि नहीं । सम्राट की यह कहानी तो बस एक कहानी ही है लेकिन जो लोग जानते हैं के हम भी बहुत बार जन्म ले चुके हैं ।

बस हर बार शरीर बदल जाता है । सम्राट का भी बदल गया । बेटे का मिल जाता था, उम्र मिल जाती थी लेकिन शरीर बेटे का मिल जाता था । हजारों वर्षों से हम भी जन्म मरण के चक्कर में भटक रहे हैं । अलग अलग शरीर के साथ उसी सुख की तलाश में लेकिन वह किसी को मिलता नहीं है । भागवत गीता में भी श्री कृष्ण ने कहा है कि सुख के मोह में ही इंसान बार बार इस दुनिया में जन्म लेता है फिर जन्म लेता है जिंदगी भर सुख की तलाश में भटकता है और मर जाता है ।

उसका मोह फिर भी खत्म नहीं होता वह फिर से सुख को भोगने की इच्छा से दूसरे शरीर में जन्म लेता है और यह चक्र चलता रहता है लेकिन उसकी जगह तलाश तब खत्म होगी जब तक वह उस सुख को अपने अंदर नहीं खोज लेता ।

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