- - Sakhi guru nanak dev ji-सदना कसाई की कहानी - Sakhi guru nanak dev ji-सदना कसाई की कहानी

Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

Sakhi guru nanak dev ji-सदना कसाई की कहानी

Sakhi guru nanak dev ji
Sakhi guru nanak dev ji

Sakhi guru nanak dev ji

प्राचीन समय की बात है, सदना  नाम का एक आदमी गांव में रहता था । सदना कसाई था और गांव में ही उसकी दुकान थी  । सदना कसाई का रोज का काम था दुकान पर जाना और बकरे काटना और फिर उसका मांस बेचना । सदना कसाई इस प्रकार अपना  जीवन यापन कर रहा था । सदना अपने इस काम से काफी खुश था क्योंकि इससे उसका गुजारा बहुत अच्छी तरह से हो जाता था  ।

एक वीरवार की बात है, सदना  सोच रहा था कि थोड़ा सा ही मास बचा है इसको आज ही बेचकर दुकान बंद कर के चला जाऊंगा, अगर बच गया मांस तो कल तक खराब हो जाएगा क्योंकि कल जुम्मे का दिन है और कोई भी मांस खरीदने नहीं आएगा और आज नया बकरा काटने का तो कोई फायदा ही नहीं है जो थोड़ा बहुत मास बचा है उसको ही निकाल देता हूं  ।

कसाई सदना अभी यह सोच ही रहा था कि दुकान पर एक ग्राहक आ गया और बोला भाई जरा बकरे का मांस देना  । सदना ने मास को तोल कर ग्राहक को दिया और उसके पैसे ले लिए  । सदना की दुकान में अब मांस समाप्त हो गया था इसलिए सदना सारा सामान समेटकर दुकान बंद करके घर के लिए चला गया  ।

Sakhi guru nanak dev ji

सदना कसाई को घर पहुंचे अभी थोड़ी ही देर हुई थी कि किसी ने उसके घर के दरवाजे को खटखटाया, सदना सोचने लगा कि इस वक्त कौन आ सकता है ? कसाई साधना ने जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने उसे दो आदमी खड़े दिखाई दिए, वह आदमी बोले हम जमीदार के आदमी हैं, उनके घर में मेहमान आए हैं और उनकी आवभगत के लिए घर में मांस पकाना है  । हम लोग पहले तुम्हारी दुकान पर गए थे लेकिन दुकान पर ताला लगा था इसलिए हमने सोचा कि तुम्हारे घर चले जाते हैं  । खाली हाथ जमीदार के पास जा नहीं सकते थे क्योंकि वह नाराज होता इसलिए मास लेने तुम्हारे घर तक चले आए  ।

कसाई सदना बोला अच्छा तो तुम्हें जमीदार ने भेजा है  लेकिन आज मैंने जितने भी बकरे काटे थे वह सब बिक गए हैं  । इस समय मैं बकरा काट नहीं सकता इसलिए तुम कल सुबह आ जाना मैं तुम्हें मास दे दूंगा लेकिन वह दोनों व्यक्ति जिद पर अड़ गए कि नहीं हमें अभी मांस चाहिए  । कसाई सदना बोला की तुम लोग समझ क्यों नहीं रहे, क्योंकि तुम लोगों को तो थोड़ा सा मास ही चाहिए और कल जुम्मे का दिन है इसलिए कोई भी मांस खरीदने नहीं आएगा और परसों तक तो मांस खराब हो जाएगा इसलिए मैं अभी बकरा नहीं काटना चाहता  । मेरा बहुत ज्यादा नुकसान हो जाएगा इसलिए मैं आपको मना कर रहा हूं  ।

तुम लोग कल सुबह आ जाना, मैं उसी वक्त बकरा काट कर तुम्हें मास दे दूंगा क्योंकि एक दिन में मांस खराब नहीं होगा और बचा हुआ मास मैं परसों बेच लूंगा  । दोनों व्यक्ति कसाई सदना को धमकी देने लगे कि हम लोग जमीदार के आदमी हैं अगर तुमने हमें मास नहीं दिया तो हम सारी बात जमीदार को बता देंगे और फिर जमीदार तुम्हारा क्या अंजाम करेगा, वह तुम खुद ही देख लेना  ।

Sakhi guru nanak dev ji

कसाई सदना सोच में पड़ गया के अगर मैं मांस दूं तो भी फंसा और ना दूं तो भी फंसा क्योंकि मांस तो दो दिनों में खराब हो जाएगा  । कसाई सदना ने कुछ सोचा और फिर उनको बोला, एक तरीका है जिस से मेरा नुकसान भी नहीं होगा और तुम्हारा काम भी हो जाएगा  । मैं एक काम करता हूं, बकरे की एक टांग और ऊपर का हिस्सा काटकर तुम्हें दे देता हूं  । इस तरह से तुम्हें भी मास मिल जाएगा और दो दिनों तक मांस खराब भी नहीं होगा और दो दिनों के बाद मैं बकरे को मार दूंगा  ।

यह बात सोच कर कसाई सदना ने चाकू को उठाया और बकरे को काटने के लिए आगे बढ़ गया  । कसाई सदना को अपनी तरफ आते देख कर पहले तो बकरा जोर जोर से हंसने लगा और फिर रोने लग गया। कसाई सदना ने जब यह सब देखा तो वह हैरान रह गया और बकरे को कहने लगा, यह क्या बात हुई पहले तो तुम मुझे देख कर जोर जोर से हंसने लगे और अब रो रहे हो इस बात का क्या राज है ?

बकरा सदना को कहने लगा ए भाई बहुत जन्म हो गए, कभी मैं कसाई बनता हूं और तुम बकरे बनते हो और कभी मैं बकरा बनता हूं और तुम कसाई बनते हो, कभी तुम मुझे काटते हो और कभी मैं तुम्हें काटता हूं, जन्मों-जन्मों से यही रीत चली आ रही है लेकिन आज जो तुम करने जा रहे हो वह पहले कभी नहीं हुआ है और इसी बात पर मुझे हंसी आ रही है और रोना इसलिए आ रहा है कि तुम मेरी एक टांग काटने वाले हो और दो दिनों तक मैं इसी तरह तड़पता रहूंगा और तुम दो दिनों के बाद मेरे प्राण लोगे बस इसी बात पर मैं रो रहा हूं कि दो दिनों तक मुझे भयंकर दर्द सहना पड़ेगा पर भाई सदना एक बात याद रखना जो तुम आज मेरे साथ कर रहे हो वही मैं कल तुम्हारे साथ करूंगा । आज तुम मेरी टांग काट रहे हो और कल तुम्हारी टांग कटने की बारी होगी, आज मेरी तड़प तड़प कर मृत्यु होगी और कल तुम्हारी तड़प तड़प कर मृत्यु होगी  ।

बकरे के मुंह से यह सब सुनते ही कसाई सदना भौचक्का रह गया  । कसाई सदना ने उसी समय बकरे नहीं काटने का निर्णय ले लिया और जाकर जमींदार आदमियों के सामने जाकर बोला अब चाहे कुछ भी हो जाए, चाहे जमीदार मुझे मार भी दे लेकिन मैं अब कभी बकरे नहीं काटुगां क्योंकि मुझे अभी पता चला है जैसे हम कर्म करेंगे वैसा ही नतीजा हमें भोगना पड़ेगा  । जो फसल बोएंगे वही एक दिन काटनी पड़ेगी इसलिए आज के बाद मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिसका नतीजा मुझे बाद में भोगना पड़े  । आज से भगवान कि मैं सच्ची भक्ति करूंगा  । इस तरह एक घटना ने सदना कसाई को भक्त सदना बना दिया और परमात्मा की ज्योत सदना भगत में ऐसी जली कि उनकी वाणी को श्री गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान मिला  ।

शिक्षा : इस सुंदर कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें जीवन में हर कर्म सोच समझ कर करना चाहिए क्योंकि क्योंकि जो भी हम आज करेंगे वह कर को हमारे साथ भी होगा । कर्म अपने कर्ता को करोड़ों की भीड़ में से भी ढूंढ लेता है इसलिए जीवन में हमेशा अच्छे कर्म ही करने चाहिए ।

दोस्तों अगर आपको मेरा यह ब्लॉग अच्छा लगा हो तो कृपया व्हाट्सएप और फेसबुक पर शेयर कीजिए, आप अपनी प्रतिक्रिया मुझे कमेंट के रूप में भी दे सकते हैं

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ