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Sakhi guru nanak dev ji in hindi- गुरु नानक देव जी और जादूगरनी नूरशाह

Sakhi guru nanak dev ji in hindi
Guru Nanak dev ji ki sakhiyan

गुरु नानक देव जी और जादूगरनी नूरशाह

एक बार श्री गुरु नानक देव जी लोगों का उद्धार करते करते कामरूप के इलाके में पहुंच गए जो आजकल आसाम में है । भाई मरदाना जी को बहुत भूख लगी थी इसलिए उन्होंने गुरुजी से गांव जाने की आज्ञा मांगी और कहा कि मुझे बहुत भूख लगी है, मैं गांव में जाकर कुछ खाने का प्रबंध करता हूं ।

श्री गुरु नानक देव जी ने मरदाना जी गांव जाने से मना भी किया और कहां की इस गांव में बहुत खतरा है क्योंकि औरतों का राज है और वह जादूगरनियां है, गांव की औरतें आदमियों के ऊपर जादू करके अपने वश में कर लेती है लेकिन भाई मरदाना जी ने कहा कि आप जो बात कह रहे हो वह ठीक है लेकिन खाने के बिना भी तो काम चल नहीं कर सकता इसलिए खाने के इंतजाम के लिए तो गांव में जाना ही पड़ेगा । आप चिंता ना करें मैं सावधान रहूंगा ।

भाई मरदाना जी जब गांव में पहुंचे तो गांव की खूबसूरती देखकर हैरान रह गए, मरदाना जी को गांव में हर चीज खूबसूरत और मनमोहक लगी । गांव में मरदाना जी को कुछ औरतें कुए पर पानी भरती हुई नजर आई, भाई मरदाना जी उन औरतों के पास गए और उनको कहा, मुझे बहुत प्यास लगी है क्या आप मुझे पानी पिला सकती है ? भाई मरदाना जी की भाषा और वेशभूषा देखकर सभी औरतें आपस में कुछ बातें करने लगी के यह कोई परदेसी लगता है । हम इसको अपने जादू के जाल में फंसा सकते हैं ।

गुरु नानक देव जी और जादूगरनी नूरशाह

उन औरतों में से एक औरत ने भाई मरदाना जी को पानी पिलाया और अपनी जादू की शक्ति से उन्हें अपने वश में कर लिया । उस औरत ने एक धागा जिसको अपनी तांत्रिक विद्या से तैयार किया हुआ था भाई मरदाना जी के गले में डाल दिया । इस धागे में वशीकरण मंत्र का प्रभाव था, यह धागा जिसके गले में डाल दो वह व्यक्ति धागा डालने वाले का गुलाम बन जाता है । अब भाई मरदाना जी उस औरत के वश में थे1 और जो भी वह औरत कहती थी भाई मरदाना जी वही करते थे । कहने का मतलब यह है कि भाई मरदाना जी एक आज्ञाकारी सेवक की तरह उस औरत के गुलाम हो गए थे ।

उधर दूसरी तरफ श्री गुरु नानक देव जी भाई मरदाना जी का इंतजार करते रहे लेकिन जब भाई मरदाना जी वापस नहीं आए तो गुरु जी सब कुछ समझ गए और गुरु जी खुद भाई मरदाना जी को तलाश करने के लिए गांव में आ गए । जब उन औरतों की नजर गुरुजी पर पड़ी तो वह समझ गई यह परदेसी पहले वाले परदेसी का साथी है जो उसे खोजने के लिए यहां आया है, हमें इसको भी अपने वश में करना होगा ।

औरतों ने श्री गुरु नानक देव जी के चेहरे की तरफ देखा तो वह समझ गई कि यह परदेसी पहले व्यक्ति की तरह सीधा-साधा नहीं है बल्कि बहुत तेज और चतुर नजर आता है'। यह सोचकर सभी औरतें गुरुजी के गले में तंत्र मंत्र विद्या वाला धागा डालने के लिए पहुंची, इस धागे में उन्होंने अपनी सभी तरह की तंत्र शक्ति का उपयोग किया लेकिन गुरु जी के ऊपर सभी तंत्र मंत्र असफल हो गए, उन औरतों का कोई भी वार गुरु जी के ऊपर कामयाब नहीं हो सका ।

श्री गुरु नानक देव जी भाई मरदाना जी की तरफ बढ़े, गुरु जी को अपनी तरफ आते देख कर भाई मरदाना भेड़ की तरह मैं मैं करने लग गए, जैसे वह गुरु जी से  मिन्नतें कर रहे हो के मुझे इस मुसीबत से बचाओ । गुरुजी ने भाई मरदाना से कहा, भाई मरदाना जी बोलो सत करतार, तुम एक इंसान हो कोई भेड़ नहीं हो, इंसानों की तरह खड़े हो जाओ और अपना रबाब उठाओ और इन भटकी हुई औरतों को सही रास्ते पर लाने के लिए अपने रबाब के साथ मेरी मदद कर, भाई मरदाना जी उठ गए और गुरु जी के चरणो में गिर गए ।

गुरु नानक देव जी और जादूगरनी नूरशाह

इसके बाद उन औरतों ने यह सारी बात अपनी रानी जादूगरनी नूरशाह को बताई । जादूगरनी नूरशाह ने जब औरतों की बात सुनी तो वह खुद चलकर गुरुजी के पास आई और अपनी शक्ति से गुरुजी को अपने वश में करना चाहा लेकिन श्री गुरु नानक जी के ऊपर जादू ना चला । जब जादूगरनी नूरशाह अपने सभी तंत्र मंत्र करके हार गई तो वह गुरु जी से माफी मांगने लगी और कहने लगी कि हम लोगों ने बहुत पाप किए हैं । हमें इन सभी पापों से आजाद करो ।

श्री गुरु नानक देव जी ने कहा कि कभी भी अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल मत करो, अगर अपना भला  चाहती हो तो मनुष्य के कल्याण के लिए काम करो जिससे परमात्मा खुश होगा । तुम्हारा और बाकी औरतों का भला भी इसी में है के तंत्र मंत्र विद्या त्याग कर सत्संग की स्थापना करो जहां  राम नाम की उपासना हो और सभी उस परमात्मा की भक्ति करें ।

श्री गुरु नानक देव जी के वचन सुनकर जादूगरनी नूरशाह ने सिखी को धारण कर लिया और प्रचारक के तौर पर काम करने लग गई । जादूगरनी नूरशाह ने अपनी सारी धन-दौलत लोगों में बांट दी और अपने सभी दास दासियों को आजाद करके सिखी का प्रचार करना ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया

शिक्षा : इस सुंदर साखी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपनी ताकत का कभी भी गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, अगर हमें परमात्मा ने कुछ विलक्षण ताकत दी है तो उसे लोगों की भलाई के लिए इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि इस दुनिया में परमात्मा ने हमें भेजा ही एक दूसरे की मदद के लिए है ।

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