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Sakhi guru nanak dev ji-गुरुजी जब मक्का की तरफ पैर करके सो गए

गुरुजी जब मक्का की तरफ पैर करके सो गए
Sakhi guru nanak dev ji

गुरुजी जब मक्का की तरफ पैर करके सो गए

एक समय की बात है, भाई मरदाना जी श्री गुरु नानक देव जी को कहने लगे, गुरुजी मक्का पर हज करने बहुत सारे लोग जाते हैं, हम भी एक बार वहां चले ? श्री गुरु नानक देव जी ने मरदाना जी को कहा, मक्का यहां से बहुत दूर है, वहां पहुंचने में महीनों लग जाते हैं और वैसे भी किसी हिंदू को वहां जाने की इजाजत भी नहीं है ।

भाई मरदाना जी ने कहा कि गुरु जी आपके लिए तो पलक झपकने के समान है इतना रास्ता, आपके लिए क्या मुश्किल है । श्री गुरु नानक देव जी ने मरदाना जी को कहा कि भाई मरदाना मक्का तो हमारे अंदर ही है । आदमी अपने अंदर से ढूंढने की कोशिश करें तो सब कुछ यहीं मिल जाएगा फिर भी अगर तुम्हारा दिल वहां जाने का है तो चलते हैं ।

श्री गुरु नानक देव जी और भाई मरदाना मक्का जाने के लिए चल दिए । गुरुजी और भाई मरदाना करतारपुर से चलकर तलवंडी शकरपुर गाजीखा होते हुए सिंध पहुंच गए और फिर वहां से मक्का जाने वाले हाजियों के साथ मिल गए । गुरु नानक देव जी और भाई मरदाना जब उन लोगों के साथ जाकर मिल गए तो हाजी इनकी वेशभूषा देखकर सोचने लगे के यह कोई हिंदू है या मुसलमान है । एक हाजी ने उनसे पूछा कि आप मुसलमान हो या हिंदू, बाबा नानक ने कहा कि हम भगवान के बंदे हैं ।

हाजी थोड़ी दूर तक उन दोनों को अपने साथ ले गए लेकिन थोड़ा आगे जाने पर उन्होंने कहा कि हिंदुओं को आगे जाने की इजाजत नहीं है । श्री गुरु नानक देव जी भाई मरदाना वहीं पर रुक गए । हाजियों ने उनको कहा कि आगे एक ऐसा स्थान है जहां हिंदुओं को कत्ल कर दिया जाता है । बाबा नानक जी ने भाई मरदाना को कहा कि हम लोग यही रुकते हैं फिर बाबा नानक ने मरदाना को कहा कि आप शब्द बोलो मैं गुरबाणी का कीर्तन करता हूं ।

गुरुजी जब मक्का की तरफ पैर करके सो गए

जब शब्द गाते गाते दिन का तीसरा पहर हो गया तो भाई मरदाना जी ने अपनी आंखें खोली, अरदास की ओर शब्द का भोग डाला तो गुरु नानक देव जी ने कहा कि भाई मरदाना जी सामने देखो क्या है ? भाई मरदाना को सामने मक्का नजर आया । भाई मरदाना बड़ा हैरान हुआ कि हम लोग मक्का के इतने नजदीक पहुंच गए हैं । भाई मरदाना जी ने गुरु नानक देव जी को कहा कि गुरुजी जहां हम बैठे थे वहां से मक्का काफी दूर था लेकिन आप के चमत्कार से हम सिर्फ तीन पहर में ही यहां पहुंच गए ।

मक्का के नजदीक पहुंचकर श्री गुरु नानक देव जी और भाई मरदाना ने हाजियों जैसे कपड़े पहन लिए और सर पर टोपी भी वैसे ही लगा ली और एक हाथ में माला भी पकड़ ली । श्री गुरु नानक देव जी ने मरदाना को कहा कि हमने कुछ बातें मक्का के गाजी रुकनुद्दीन के साथ करनी है । बाबा नानक जी मरदाना जी के साथ मस्जिद में जाकर बैठ गए । श्री गुरु नानक देव जी और भाई मरदाना जी ने पूरा दिन वहां पर आराम किया और जब रात का समय आया तो श्री गुरु नानक देव जी मक्का की तरफ पैर करके सो गए । 

सुबह के समय जब मस्जिद का कर्मचारी वहां पर सफाई करने आया तो उसने देखा एक हाजी मक्का की तरफ पैर करके सो रहा है । कर्मचारी का नाम सैफुद्दीन था, उसने आसपास देखा तो पुराने हाजी तो सही तरह से सो रहे हैं लेकिन यह नया हाजी जो कल आया है वह काबे की तरफ पैर करके सो रहा है। कर्मचारी को यह देखकर बहुत गुस्सा आया और वह गुरु जी को बोला, तुम कौन काफिर हो जो खुदा के घर काबे की तरफ पैर पसार कर सो रहे हो । गुरुजी ने बड़ी ही सादगी से जवाब दिया के मैं लंबे सफर की वजह से थक गया था इसलिए मुझे पता नहीं चला कि खुदा का घर कहां है । आप एक काम करो मेरे पैर पकड़कर उस तरफ कर दो जहां खुदा का घर नहीं है।

गुरुजी जब मक्का की तरफ पैर करके सो गए

गुरुजी की बात सुनकर उस कर्मचारी ने गुस्से में गुरु जी के पैर पकड़कर दूसरी तरफ कर दिए लेकिन जब उसने गुरु जी के पैर छोड़ कर देखा तो उसको काबा उसी तरह नजर आया जिस तरफ उसने पैर किए थे, इसी तरह उसने पैर जब पकड़ के तीसरी तरफ किए तो उसे काबा फिर उसी तरफ नजर आया जिस तरह उसने पैर पकड़कर किए थे । कर्मचारी यह देखकर बहुत हैरान हुआ कि मैं जिस तरफ भी इनके पैर करता हूं काबा उसी तरह ही घूम जाता है तो उसने यह बात बाकी हाजियों को भी बताई । सब लोग हैरान होकर श्री गुरु नानक देव जी के चारों तरफ इकट्ठे हो गए  ।

श्री गुरु नानक देव जी ने उनको समझाया कि आप लोग हजरत मोहम्मद साहब के वचन भूल गए हो, जिस तरफ भी आप मुंह करोगे अल्लाह उसी तरह ही होगा क्योंकि अल्लाह सर्वशक्तिमान है और सर्व व्यापक है । अगले दिन रुकनुद्दीन हाजी के साथ सब हाजी गुरुजी के चारों तरफ इकट्ठा हुए और काफी देर तक उनकी इस बारे में चर्चा हुई । रुकनुद्दीन ने गुरु जी से पूछा कि हिंदू बड़ा है या मुसलमान ? गुरु नानक देव जी ने जवाब दिया कि कोई भी हिंदू या मुसलमान होने से बड़ा या छोटा, अच्छा या बुरा नहीं हो जाता, बल्कि अच्छे और बुरे काम करने से ही इंसान अच्छा या बुरा होता है । मरणोपरांत इंसान के अच्छे या बुरे कर्म ही साथ जाते हैं और उन कर्मों का हिसाब कोई भी नहीं टाल सकता क्योंकि अल्लाह के घर किसी की सिफारिश नहीं चलती । अल्लाह के घर सब कुछ कर्मों के हिसाब से ही चलता है ।

गुरु नानक देव जी का उपदेश सुनकर सभी को तसल्ली हो गई । श्री गुरु नानक देव जी ने रुकनुद्दीन पांच उपदेश दिए, अल्लाह की भजन बंदगी करनी, हमेशा सत्य की राह पर चलना, हक हलाल की कमाई खाना, मिल बांट कर खाना और अपनी कमाई में से 10वां हिस्सा निकालना, गुरु नानक देव जी ने कहा इन सभी बातों पर अमल करोगे तो अल्लाह की दरगाह में जगह मिलेगी । रुकउद्दीन गुरु जी के चरणो में गिर गया और उसने गुरु जी से प्रार्थना की के अपनी इस मुलाकात की कोई निशानी दो, श्री गुरु नानक देव जी ने अपनी खड़ाऊ उनको दे दी जो यादगार के तौर पर उनकी औलाद बहावलपुर के पीरों के पास संभाल कर रखी गई है । मक्के से गुरु नानक देव जी और भाई मरदाना मदीना भी गए और वहां पर भी उन्होंने सत्य धर्म का उपदेश दिया और अपने सिख बनाए ।

शिक्षा : श्री गुरु नानक देव जी की साखी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर हम परमात्मा को पाना चाहते हैं तो हमें उसको अपने अंदर ही ढूंढना पड़ेगा क्योंकि जो कुछ भी है वह हमारे अंदर ही है इसलिए इधर-उधर भटकना छोड़कर अपने अंदर उस परमात्मा को तलाश करें और श्री गुरु नानक देव जी के बताए हुए मार्ग पर चलें और उनके बताए हुए पांच उपदेशों का पालन करें ।

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